होली के रंग हो, गीत कविता हो या फिर घरों में बनने वाली गुजियाँ या मिठाइयां शायद ही देश-विदेश में कोई हो जिसे होली का त्यौहार अपनी ओर आकर्षित ना करता हो. होली हिन्दू धर्म का एक महाव्त्पूर्ण पर्व हैं जो यह सन्देश देता हैं अगर आप भगवान में अटूट विश्वास रख स्मरण करते हैं तो भगवान आपकी सदा रक्षा करते हैं.
रंगों का त्होयौहार होली मुखतः दो दिन का हिंदू पर्व हैं – फाल्गुन माह के पहले दिन होलिका दहन होता फिर उसके अगले ही दिन धुलंडी/रंग वाली होली खेली जाती हैं. पर इस साल लोगों यहाँ तक की ज्योतिष विद्वानों में भी होलिका दहन और रंग वाली होली को लेकर संशय देखा जा रहा हैं. अगर आप भी इसी संशय के साथ यहाँ आए हैं, तो यह आर्टिकल आपके सारे संशय 100% दूर कर देगा.
होलिका दहन 2025 तिथि –
फाल्गुन के पहले दिन यानि 13 मार्च, 2025 को पुरे दिन भद्रा का साया रहेगा. शास्त्र अनुसार,‘भाद्रयां न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा’ जिसका हिंदी में अर्थ है ‘भद्रा काल में श्रावणी फाल्गुनी नक्षत्रों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि वह अशुभ माना जाता हैं’. यानि भद्रा में दोनों ही त्यौहार होली(फाल्गुनी) या रक्षाबंधन(श्रावण) को नहीं मनाया जा सकता.
तो प्रश्न उठता हैं होलिका दहन कब करें ?
सुबह 10:35 से रात 11:26 तक भद्रा का साया रहेगा. इस दौरान भूल कर भी होलिका दहन ना करें.
होली दहन का शुभ महूर्त –
हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 मार्च रात 11:27 से लेकर 14 मार्च 12:30 तक लगभग 01 घंटा 40 मिनट शुभ महूर्त रहेगा. यह समय उत्तम हैं होलिका दहन करने के लिए.हिंदू पंचांग में होली की तिथि 14 या 15 मार्च, 2025 –
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि सुबह 13 मार्च 10:35 आरंभ होकर रात 14 मार्च 12:35 पर ख़त्म हो जाएगी. यानी 14 मार्च सुबह से ही भारत में होली खेली जा सकती हैं.
कुछ देश जहाँ 14 मार्च को सुबह 09:29 से
लेकर दोपहर 03:29 तक चंद्रग्रहण पड़ रहा हैं जिनमें यूरोप के देश, अमेरिका, कैनेडा,
ऑस्ट्रलिया, जैसे कुछ बड़े देश शामिल हैं, तो वहां 15 मार्च को होली खेली जा सकेगी.

-min%20(1).png)
-min.png)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें