सनातन धर्म में हर माह कोई ना कोई बड़ा पर्व आता है, उन्हीं कुछ अहम पर्वों में से एक है भगवान शिव से जुड़ा महापर्व महाशिवरात्रि। पूरी रात्रि मनाया जाने वाला महापर्व MahaShivRatri आध्यात्मिक जगत में विचरने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है, पवित्र रात्रि का प्रयोग भक्त अपनी ऊर्जाओं को परमपिता परमत्मा शिव से एकाकार करने के लिए करते है।
महाशिवरात्रि कब होती है -
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि' ( माह का 14वां दिन) महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है अमावस्या से एक दिन पूर्व चतुर्दशी आती है। आम भाषा में अमावस्या को काली रात कहा जाता है क्युकि इस रात चन्द्रमा नही दिखता।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है -
पुराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान् शिव ने प्रथम बार ज्योतिर्लिंग का रूप धरा था। इस दिन ही भगवान् शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान कालकूट नाम भयानक विष निकला था, यह विष सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता रखता था। पश्चात कालकूट विष भगवान शिव अपने कण्ठ में धारण करके इस जगत के प्राणियों के साथ साथ देवता असुरों के जीवन की भी रक्षा करते है। इसी कारण भगवान शिव का एक नाम नील कण्ठ भी पड़ा।
खगोल के अनुसार इस दिन धरती का उत्तरी गोलार्द्थ इस प्रकार की स्थित में होता है कि इस दिन साल भर की सबसे ज़्यादा गतिविधियाँ मनुष्य शरीर में होती है। मनुष्य की भीतरी ऊर्जा स्वाभाविक ही इस रात ऊपर की ओर जाती है, जो उस परम तत्व की अनुभूति के लिए अतिआवश्यक है।
2025 महशिवरात्रि विवरण :
26 फ़रवरी 2025 को महाशिवरात्रि मनाया जाएगा।
चतुर्दशी आरंभ - 26 फ़रवरी, सुबह 11 बज के 11 मिनट पर
चतुर्दशी अंत - 27 फ़रवरी, सूबह 8 बज के 57 मिनट पर
शुभ रात्रि पूजा महूर्त - रात 12 बज के 8 मिनट से 12 बज के 58 मिनट तक ( कुल अवधि : 50 मिनट)
पारण पूजा मुहुर्त - सुबह 6 बजकर 49 मिनट से लेकर 8 बजकर 57 मिनट तक

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