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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

शिव का अर्थ और शिव मंत्र HINDI 2025


शिव भारतीय संस्कृति के सबसे प्रचलित भगवानों में से एक और त्रिदेवों में अपना एक बहुत अहम स्थान रखते है। शिव के बारें में सुनकर हमारा मन असीमित कल्पनाओं से भर उठता है साथ ही एक अलग सी उत्सकता की तरंगे हमारे अंदर हिडोले मारने लगती है। शास्त्र शिव के गुणों और शक्तियों की प्रशंषा करते करते नहीं थकते, उन्हें देवों के देव की संज्ञा देते हैं। 



शिव का सही अर्थ क्या होता है ?

वैसे तो शास्त्रों में शिव शब्द की अलग अलग व्याख्या दी गयी है। शिव का शाब्दिक अर्थ 'व्यापक शून्यता यानि जो है ही नहीं। एक प्रश्न मन में उठता है जो है ही नहीं जिसका अस्तित्व नहीं है तो वो इतना परम शक्तिशाली कैसे है। आज का विज्ञान भी मानता है कि 'सब कुछ शून्यता से ही आया है और वापिस शून्य में ही समा जाता है'। यानि सम्पूर्ण ब्रह्मांड मात्र एक व्यापक ख़ालीपन यानि शिव है। जो ब्रह्मांड में अरबों सक्रिय आकाशगंगाएँ, डार्क मैटर्स, ब्लैक हॉल्स, सितारे, धूल, आदि वह उस व्यापक शून्यता (शिव) का ही एक छोटा सा हिस्सा है, जो शिव से निकलकर शिव में ही लीन हो जाता है। 



कुछ और व्याख्याओं के अनुसार शिव का अर्थ 'शुभ', 'मंगल', 'कल्याण करने वाला', 'जीवन की गहन समज' भी है।  


शिव संहारक या उद्धारकर्ता

शास्त्रों के अनुसार शिव इस जगत का अंत कर इसका उद्धार करते है। शास्त्रीय मत के अनुसार ब्रह्मांड का अंत एक सकारात्मक प्रकिया है जो पुनः नए जीवन की उत्पति का कारण बनता है। शास्त्रीय दृष्टिकोण से 'संहारक' शब्द सकारात्मकता को दर्शाता है। 




                    शिव के कुछ अति प्रभावशाली मंत्र 

भगवान शिव के मंत्र उच्चारण करने के पहले मानसिक और शारीरक सुचिता अति आवश्यक है। मंत्रों उच्चारण से पूर्व स्नान करें पश्चात 1-2 मिनट आँख बंद कर मात्र ध्यान कर मन को पवित्र करें उसके बाद मंत्रों का जाप करें।


1) मूल मंत्र - 

ॐ नमः शिवाय, यह मूल मंत्र बड़ा ही प्रभावी है मन बुद्धि को शांति प्रदान करने वाला है। 


2) शिव गायत्री मंत्र - 


ओम तत्पुरुषाय विदमहे महादेवाय दीमहि। तन्नो रुद्रा प्रचोदयात ।।


अर्थ - ओ ओ महांतम प्रभु, मुझे अनुपम ज्ञान और बुद्धि प्रदान करे, मेरी बुद्धि मे दिव्य प्राणो का संचार करे.


एक अन्य संस्करण शिव गायत्री मंत्र का 


ॐ सर्वेश्वराय विदमहे, शूलहस्ताय धीमहि । तन्नो रुद्र प्रचोदयात ।।

अर्थ - हे सभी के स्वामी, आपके हाथ मे त्रिशूल है, मेरे जीवन मे जो शूल कष्ट है, वो आपकी कृपा से ही नष्ट होगे. मै आपकी शरण मे हूं.


3 ) शिव ध्यान मंत्र - 


करचरण कृतं वाक्काजयजं कर्मजं वा, श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं। 

विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षामस्व, जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो।। 

अर्थ - मेरे हाथों और पैरों द्वारा किए गए कार्यों, मेरी वाणी द्वारा किए गए जो भी पाप हैं, मेरे कानों और आँखों द्वारा उत्पादित या मेरे द्वारा किए गए पाप। 

निर्धारित कार्यों करते समय या अनिर्धारित कार्यों को करते समय हुए पाप उन सभी को क्षमा करें, जय हो ! जय हो ! महादेव शम्भो मैं आपके सामने आत्मसमर्पण करता हूं, आप करुणा के सागर हैं ।।


4 ) महामृत्युंजय मंत्र -


ॐ त्रयंभकम यजामहे, सुगंधिम् पिष्टिवर्धानम।

उर्वारुकमिव बंधानान, मृत्योर्मुक्षीय मामृतत् ।।


अर्थ - हम त्रिनेत्र को पूजते है,जो सुगंधित है हमारा पोषण करते है

जिस तरह फल,शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है

वैसे ही हम भी,मृत्यु से मुक्त हो जाते है.



5 ) सम्ब सदा शिवा मंत्र - 


ओम सम्बा सदा शिवाय नमः


अर्थ - मैं भगवान सदा शिव को नमन करता हूं.


6) रुद्र मंत्र - 

ॐ नमोः भगवते रुद्राय नमः 

इस मंत्र के माध्यम से आप अपनी कामनाएँ भगवान शिव तक पंहुचा सकते हैं। 


इस आर्टिकल को पढ़कर आप भगवान को विस्तृत रूप से जान पाएगें साथ ही शिव के बारें लोगों की भ्रांतिया भी दूर कर पायेगें। आर्टिकल में बड़ी गहनता के साथ शिव कौन है, शिव का अर्थ और शिव मंत्र जिनकी शक्ति आपका जीवन बदल देगी को परिभाषित किया गया है। 

आर्टिकल अच्छा लगें तो कृपया आगे जरूर शेयर करें। धन्यवाद 🙏





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